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थोड़ी उमर है सूना सफर है मेरा न साथ कोई

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यदि वास्तविक मुकेश के स्वर का आनंद लेना हो तो आपको शंकरजयकिशन के संगीत घर मे प्रवेश करना ही होगा!मेरा यह आशय कदापी नही कि अन्य संगीतकारो के साथ उनका गायन अच्छा नही था!किन्तु उनका विशिष्ठ गायन शंकरजयकिशन की संगीत शैली में एक अनोखा रूप ले लेता था।मुकेश के संगीतकार शंकरजयकिशन के संगीत में गाये गीतों ने ही उन्हें उस स्थान पर स्थापित कर दिया जिसका दीवाना अतिं विशिष्ठ उच्च वर्ग था।इसका मूल कारण था मुकेश के इन गीतों में जीवन का दर्द व सच्चाई होती थी,इन गीतों में दार्शनिक भाव होता था!यही कारण है पूरी फिल्म में चाहे मुकेश का एक ही गीत हो किन्तु वह फ़िल्म के अन्य सभी गीतों पर भारी पड़ता था।यह शंकरजयकिशन व मुकेश की बेहतरीन केमिस्ट्री थी,उस पर शैलेन्द्र अथवा हसरत जयपुरी के लिखे गीत हो तो वह सोने पर सुहागा बन जाते थे,ऐसा ही एक गीत फ़िल्म आह में था जिसे जनाब हसरत जयपुरी साहिब ने लिखा था----- रात अंधेरी दूर सवेरा बर्बाद है दिल मेरा यह हताश व निराश मानव की सौंच को दर्शाता एक कालजयी गीत है।इस गीत में निराश मानव को रात अंधेरी तथा दूर सवेरा नज़र आ रहा है क्योकि उसका हृदय लूट चुका है ,बरबाद ह...

शंकर जयकिशन:शाश्वत संगीत के कालजयी प्रणेता

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लेखक द्वारका प्रसाद खाम्बिया सामान्यतः कम फिल्मों में अच्छा संगीत देना संभव है परन्तु अधिक से अधिक फिल्मों में लोकप्रियता की बुलंदियों वाला संगीत अविराम व सतत 21 वर्षों तक देना ईश्वरीय वरदान है कहा जा सकता है। ऐसे वरदान से ईश्वर ने संगीतकार शंकर जयकिशन को नवाजा था। अपने नायाब संगीत द्वारा देश के साथ विदेशों में भी धूम मचा देने वाले वे प्रथम संगीतकार थे। लोगों में सदैव जिज्ञासा बनी रही कि आखिर इतनी लोकप्रिय धुनों मे से कोन धुन किसकी है। यह जिज्ञासा जयकिशन जी की मृत्यु के बाद शंकर जी विरोधी समूह ने और बढ़ा दी। वे सिद्ध करना चाहते थे कि धुन जय किशन ही तैयार करते थे । लोगो में भी यह जानने की इच्छा प्रबल होने लगी कि आखिर जयकिशन की रचनाएं कोन सी है। कुछ पुष्ट जानकारियों के आधार पर ज्ञात होता है कि निम्नांकित कुछ लोकप्रिय धुनों को जयकिशन ने ही रचा था - 1 जीना यहां मरना यहां (मेरा नाम जोकर) 2 तुम जो हमारे मीत न होते (आशिक) 3आजा सनम मधुर चांदनी में हम (चोरी चोरी) 4 आवाज दे के हमें तुम बुलाओ (प्रोफेसर) 5 इस रंग बदलती दुनियां में (राजकुमार) 6 तेरी प्यारी प्यारी सूर...